ग़ज़ा के एक स्थानीय नागरिक लोत्फ़ी अबू ताहा ने कहा कि जब से ये बात सामने आई है कि लड़ाई फिर से शुरू हो सकती है तब से हमारा दिल बैठ गया है.
लोत्फ़ी को अल-क़रारा से ख़ान यूनिस तक सात बार विस्थापित होना पड़ा है. रफाह में न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए उन्होंने कहा, “कोई अंदाजा नहीं है कि अब आगे कहां जाना है.”
उन्होंने कहा, “ट्रंप, नेतन्याहू और हमास से जुड़ी खबरों ने हालात को और भी खराब कर दिया है.”
एक और फ़लस्तीनी व्यक्ति अब्दुल रहमान अल-हबीबी का कहना है कि इसराइल और हमास को युद्धविराम समझौते का पालन करना चाहिए.
वे कहते हैं, “लोग पीड़ा में हैं और बीमार हैं, वे पूरी तरह थक चुके हैं. दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं है जो इन लोगों की रक्षा कर रहा हो.”
इससे पहले नेतन्याहू ने चेतावनी दी है कि, “अगर हमास शनिवार दोपहर तक हमारे बंधकों को रिहा नहीं करता है तो हम ग़ज़ा में युद्ध विराम ख़त्म कर देंगे और लड़ाई शुरू कर देंगे.”